Guru Purnima 2025: गुरु पूर्णिमा ज्ञान, श्रद्धा और परंपरा का महापर्व

गुरु पूर्णिमा पर्व, भारतीय संस्कृति में अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का एक महान पर्व है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष में आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा, 2025 में दिनांक 10 जुलाई दिन गुरुवार को पड़ेगा। गुरुपूर्णिमा केवल भारत में ही नहीं बल्कि नेपाल, भूटान और दुनिया के कई देशों में भी बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा, गुरु-शिष्य परंपरा का एक जीवंत प्रमाण है, जो सदियों से भारतीय समाज की नींव रही है।

गुरु पूर्णिमा का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व

गुरु पूर्णिमा का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व अत्यंत गहरा है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्हें हिंदू धर्म में सबसे महान गुरुओं में से एक माना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने कई वेदों का संकलन, महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना और अठारह पुराणों को भी लिपिबद्ध किया। उनके इस अतुलनीय योगदान के कारण ही उन्हें ‘वेदव्यास’ की उपाधि मिली। इसलिए गुरु पूर्णिमा को ‘व्यास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन विशेष रूप से उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।

गुरु की महिमा: भारतीय संस्कृति का मूल

भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान माना गया है। श्लोकों में कहा गया है:

“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः, गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्रीगुरुचरणकमलेभ्यो नमः।।“

‘गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा’ की अवधारणा इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि गुरु का स्थान समाज में कितना ऊंचा है। गुरु ही वह मार्गदर्शक है जो हमें अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। वह हमें सही और गलत का ज्ञान कराता है, हमारे जीवन को नई दिशा प्रदान करता है हमें भक्ति ज्ञान और आत्मशक्ति की प्राप्ति में सहायता करता है।

प्राचीन काल से ही भारत में गुरु-शिष्य परंपरा का विशेष महत्व रहा है। प्राचीन काल में गुरुकुल हुआ करते थे गुरुकुल प्रणाली गुरु पूर्णिमा के महत्व का जीवंत उदाहरण थी, जहाँ शिष्य, गुरु के आश्रम में ही रहकर गुरु की सेवा करते हुए ज्ञान और शिक्षा प्राप्त करते थे। महाभारत काल में अर्जुन को धनुर्विद्या सिखाने वाले गुरु द्रोणाचार्य, भगवान श्री राम को शिक्षा देने वाले महर्षि वशिष्ठ, और भगवान श्री कृष्ण जी को ज्ञान देने वाले संदीपनी ऋषि, ये सभी भारतीय इतिहास के महान धर्म गुरुओं में से हैं जिन्होंने अपने शिष्यों को केवल शिक्षा प्रदान ही नहीं बल्कि जीवन के नैतिक मूल्यों और मानवता का पाठ भी पढ़ाया।

आधुनिक युग में भी गुरु का महत्व कम नहीं हुआ है। भले ही प्राचीन काल की तरह गुरुकुल प्रणाली का स्वरूप बदल गया हो, लेकिन माता-पिता, शिक्षक, प्रोफेसर, आध्यात्मिक गुरु, और मार्गदर्शक भी हमारे जीवन में गुरु की भूमिका निभाते हैं। वे हमें शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ जीवन के विभिन्न पहलुओं पर भी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

गुरु पूर्णिमा पर्व कैसे मनाई जाती है?

गुरु पूर्णिमा पर्व के दिन भक्त और शिष्य अपने गुरुओं के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करते हैं। गुरुपूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्यक्रिया स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। मंदिरों और धर्मगुरुओं के आश्रमों में विशेष पूजा-साधना और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। शिष्य अपने गुरुओं के चरण स्पर्श कर, उन्हें उपहार भेंट करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

इस दिन कई जगहों पर भंडारे का भी आयोजन किया जाता है। लोग दान-पुण्य करते हैं और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं। आध्यात्मिक संगठनों और धर्मगुरुओं के आश्रमों में विशेष प्रवचन और सत्संग आयोजित किए जाते हैं, जहाँ गुरुजन अपने शिष्यों को ज्ञान और उपदेश देते हैं। कई लोग इस दिन उपवास भी रखते हैं और गुरु के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा का प्रदर्शन करते हैं।

गुरु पूर्णिमा का दिन केवल गुरु की पूजा का ही नहीं, बल्कि आत्म-चिंतन का भी दिन है। इस दिन हमें अपने जीवन में गुरु के योगदान को स्मरण करना चाहिए और उनके दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।

2025 में गुरु पूर्णिमा: एक अवसर आत्म-मंथन का

2025 में गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को पड़ रही है। यह एक ऐसा अवसर है जब हम अपनी व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर अपने गुरुओं को याद करें, चाहे वे हमारे स्कूल-कॉलेज के शिक्षक हों, या हमारे आध्यात्मिक गुरु हों, या हमारे माता-पिता जिन्होंने हमें जीवन का पाठ पढ़ाया। हमें उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सफल बनाने का प्रयास करना चाहिए।

आज के समय में जब भौतिकवाद और व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो रहे हैं, गुरु पूर्णिमा जैसे पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखते हैं। वे हमें मानवीय मूल्यों, नैतिकता और आध्यात्मिकता के महत्व का स्मरण कराते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चा ज्ञान केवल पुस्तकों से नहीं आता, बल्कि अनुभव, विवेक और एक सच्चे गुरु के मार्गदर्शन से आता है।

गुरु पूर्णिमा 2025 का यह दिन हमें इस बात पर भी विचार करने का अवसर देता है कि हम स्वयं अपने जीवन में किस प्रकार एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं। हम अपने से छोटों को, अपने बच्चों को, या अपने सहयोगियों को सही दिशा दिखाकर एक गुरु के रूप में कार्य कर सकते हैं। ज्ञान बांटने से बढ़ता है, और गुरु पूर्णिमा का संदेश यही है कि हमें ज्ञान के इस प्रवाह को सतत जारी रखना चाहिए।

अंततः, गुरु पूर्णिमा एक ऐसा महापर्व है जो हमें ज्ञान, श्रद्धा और परंपरा के शाश्वत मूल्यों से जोड़ता है। यह दिन हमें गुरु के महत्व को समझने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके दिखाए गए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए प्रेरित करता है। 2025 की गुरु पूर्णिमा हमें एक बार फिर यह स्मरण कराती है कि गुरु ही हमें भवसागर से पार उतारने वाले सच्चे खेवनहार हैं। उनका आशीर्वाद हमारे जीवन में सदैव प्रकाश और समृद्धि लाए।

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